मेरा जीवन
चल रही हु मुसाफिर जैसा
जींदगी का यह सफर।।
कभी सुख कभी दुख
अपने हिस्से का मानकर।।
कभी पाया साथ किसी का
कभी खोया दिल का रिशता
कभी दुसरे ने अपनाया
कभी अपनौ ने ठुकराया
अनुभव अपना झोली मे भरकर
चल रही हु मुसाफिर जैसा
जींदगी का यह सफर।।
मुश्कील खड़ी है चटान बनकर
साहस बना है हमसफर
सपने कभी न होते आंख से ओझल
भूख पयस नींद को त्याग कर
चल रही हु मुसाफिर जैसा
जींदगी का यह सफर।।
नाम बङा कमाना है
इज्जत से मुझे जीना है
शान से मुझे रहना है
संस्कार के मोती लेकर
चल रही हु मुसाफिर जैसा
जींदगी का यह सफर।।
